किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है यह फूल, मिल जाए तो कभी छोड़ना मत, वरना पछताते रह जाओगे

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गुड़हल का फूल बहुत ही सुंदर होता है। यह कई रंगो में देखने को मिलता है जैसे लाल, गुलाबी, पीला, सफेद, बैंगनी आदि। गुलहड़ का वैज्ञानिक नाम हिबिस्कस सब्दरिफा है। यह मूल रूप से अफ्रीका में पाया जाता है। गुडहल एक आम सा फूल है जो कि देखने में सुंदर होता है। ऐसे कई गुडहल के फूल हैं जो कि अलगअलग रंगों में पाये जाते हैं जैसे, लाल, सफेद , गुलाबी, पीला और बैगनी आदि। यह सुंदर सा गुडहल का फूल स्वास्थ्य के खजाने से भरा पड़ा है। सभी लोग इन फूलो को केवल पूजा के उपयोग में लेते है लेकिन वे नहीं जानते है कि यह फूल केवल पूजा में ही काम नही आता है बल्कि इसके बहुत सारे उपयोग और भी है। लेकिन हम ये भी जानते है की कोई भी चीज लाभदायक और हानिकारक दोनों ही होती है इसी प्रकार इस फूल के बहुत सारे लाभ है तो कुछ हानि भी है जिसके बारे में हम आपको बतायेगे।

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गुडहल के फूलों को सुखाकर बनाया गया पावडर दूध के साथ एक एक चम्मच लेते रहने से रक्त की कमी दूर होती है और इसी पाउडर को एक चम्मच मिश्री के साथ पानी से लेते रहने से स्मरण शक्ति तथा स्नायुविक शक्ति बढाती है।

मधुमेह या डायबिटीज के लिए नियमित आप इसकी 20 से 25 पत्तियों का सेवन शुरू कर दे ये आपकी डाइबिटीज का शर्तिया इलाज है इसका पौधा नर्सरी से आसानी से मिल जाता है और इसे आप घर में लगा सकते है।

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गुड़हल की पत्तियों को अच्छी तरह से पीसकर जैतून के पत्तों के साथ मिलाएं। अब इस पेस्ट को अपने सिर पर 10 से 15 मिनिट के लिए लगाकर रखें। फिर कुछ देर बाद हल्के गुनगुने पानी से अपने सिर को धो लें। ऐसा करने से बाल घने दिखाई देने लगेंगे।

गुडहल का फूल काफी पौष्टिक होता है क्योंकि इसमें विटामिन सी, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट होता है। यह पौष्टिक तत्व सांस संबन्धी तकलीफों को दूर करते हैं। यहां तक की गले के दर्द को और कफ को भी हर्बल टी सही कर देती है।

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