इसमें सदियों से प्राचीन भारतीय आयुर्वेद चिकित्सा में प्रयोग किया जाता रहा है।इसके औषधीय गुणों का वर्णन पारंपरिक चीनी चिकित्सा में भी व्यापक रूप से किया गया है। इसके अलावा अश्वगंधा को भारतीय जिनसेंग के रूप में भी जाना जाता है।

अश्वगंधा

अश्वगंधा की पैदावार भारत में ही सबसे अधिक होती है इसके अलावा उत्तरी अफ्रीका और मिडिल ईस्ट में भी कुछ हद तक उगाया जाता है। आयुर्वेदिक तरीके से उपचार में अश्वगंधा एक ऐसी रामबाण औषधि है जो कई प्रकार के रोगों को ठीक करने में उपयोग की जाती है। तो चलिए जानते हैं इसके चमत्कारी फायदों के बारे में।

  • इसमें सूजन कम करने, एंटी ऑक्सीडेंट और तनाव कम करने के विशेष गुण होते हैं साथ ही यह हृदय स्वास्थ्य की समस्याओं के लिए बहुत ही अच्छा होता है। इसके
    हृदय की मांसपेशियों को मज़बूत और हमारे शरीर में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है। इसके सेवन से हार्ट अटैक की सम्भवना को भी कम किया जा सकता है।
  • दिनभर की भाग दौड़ और काम काज के तनाव की वजह से अनिद्रा की समस्या काफी बढती जा रही है, इसके लिए अगर इसका सेवन किया जाए तो तनाव कम होगा इसके
    साथ नींद भी आ जाएगी इसके अलावा तनाव काम होने से आपका काम करने में मन भी लगेगा।
  • बहुत से दुर्बल और शरीर से कमजोर रहते यहीं जिसके कारण उनके अंदर आत्मविश्वास की कमी आ जाती है उनके लिए अश्वगंधा बेहद फायदेमंद है। इसके लिए अश्वगंधा और
    शतावरी को मिलाकर अब इसमें मिश्री मिलाये और रोजाना रात को सोने से पहले या फिर कसरत करने के बाद इस मिश्रण से 1 चम्मच पाउडर का सेवन गरम दूध के साथ करें।एक महीना ये उपाय करने पर वजन में वृद्धि होने लगेगी।

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  • अश्वगंधा का सेवन करने से शरीर में ब्लड शुगर का स्तर कम होता है जिससे की मधुमेह को नियंत्रण में रखने की मदद मिलती है। अश्वगंधा कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी शरीर में
    कम करता है। जो कि शुगर के मरीज के लिए बेहद फायदेमंद है।
  • एक शोध में पाया गया कि अश्वगंधा के नियमित सेवन से उम्र के बढ़ने या कम उम्र में ही स्किन पर पड़ने वाले झुर्रियो से बचा जा सकता हैं और आपके चेहरे पर चमक आ
    जाएगी। इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति को चर्म रोग की शिकायत है तो अश्वगंधा के चूर्ण को तेल में मिला कर मालिश करने से चर्म रोग को काफी हद तक दूर किया जा
    सकता है। यदि अश्वगंधा का उपयोग नियमित रूप से एक सप्ताह तक किया जाए तो आपको इसका असर दिखना शरू हो जाएगा।
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