chuhara

छुहारा का पेड़ होता है जिसपर फल लगते हैं , खजूर और छुहारा, दोनों ही पाम जाति के एक ही पेड़ से प्राप्त होते हैं। खजूर के पेड़ रेगिस्तानी इलाकों में पाए जाते हैं। यह बहुत लम्बे होते है। इनका एक ही तना होता है जिस पर बढ़ कर पत्तियां निकलती हैं। खजूर के पेड़ में डालियाँ नहीं होती। पत्ते करीब हाथ भर लम्बे होते हैं। पत्तों की नोक कंटीली होती है। पेड़ पर फल गुच्छों में लगते है। कच्चे फल हरे, पीले और पकने पर लाल होते हैं। खजूर का फल करीब ढाई से सात सेंटीमीटर लम्बा होता है। यह रंग में लाल कुछ कालापन लिए होते हैं इसके बीज लम्बे-पतले और भूरे से होते हैं। यह प्रसिद्ध मेवाओं में से एक है। छुहारे एक बार में चार से अधिक नहीं खाने चाहिए, वरना इससे गर्मी होती हैं। दूध में भिगोकर छुहारा खाने से इसके पौष्टिक गुण बढ़ जाते हैं।

छुहारे खाने से पेशाब का रोग दूर होता है। बुढ़ापे में पेशाब बार-बार आता हो तो दिन में दो छुहारे खाने से लाभ होगा। छुहारे वाला दूध भी लाभकारी है। यदि बच्चा बिस्तर पर पेशाब करता हो तो उसे भी रात को छुहारे वाला दूध पिलाएं। यह शक्ति पहुंचाते हैं।

छुहारे वाले दूध में अधिक मात्रा में पौटैशियम होता हैं। इसका सेवन करने से पेट दर्द और डायरिया जैसी समस्या से निजात मिल जाता हैं। छुहारे में कैल्शियम, कॉपर, मिनरल्स, मैग्नीज और सेलेनियम होता है, इसलिए छुहारों का सेवन दूध में डालकर करना चाहिए। इससे हमारी हड्डियां मजबूत हो जाती है। छुहारे में होने वाले फाइबर कोलोन कैंसर को दूर करने में मददगार है।

शीघ्रपतन की समस्या से परेशान लोगों को तीन महीने तक छुहारे का सेवन करने से काफी लाभ हो सकता है। इसके लिए रोजाना सुबह खाली पेट दो छुहारे टोपी समेत दो सप्ताह तक खूब चबा-चबाकर खाएं।

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