गूलर का नाम तो सुना ही होगा, अगर आप इसके बारे में नहीं जानते तो हम आपको इसकी कुछ पहचान बता देते हैं, गुलर अंजीर के फल से मिलता जुलता फल है। यह पहले तो बिलकुल हरा रहता है और पकने के बाद यह पीला या फिर लाल हो जाता है और अब आइये जाने इसे गुणों को।

  • अगर आपको बहुत अधिक प्यास लग रही हो, तो सूखे गुलर के पाउडर को पानी में डालकर पी लें।
  • कठिन से कठिन बवासीर का इलाज कच्चे गूलर के सब्जी बनाकर खाने से होता है।
    जिसे बहुत अधिक फोड़े या फुंसी होती है। उन्हें चाहिए कि वह फोडे वाले हिस्से पर गूलर का दूध लगाएं इससे वह ठीक हो जाएगा।
  • 30 ग्राम गूलर की छाल, 15 ग्राम गेहूँ दोनों को बारीक पीस 15 ग्राम देशी घी में मिलाकर गर्म करें थोड़ा गर्म रहने पर मोटा-सा लेप करके ऊपर से लेप सूखने तक लगभग 2 घंटे कपड़ा बांध दें फिर दिन में 2-3 बार दुहरायें ऐसा करने से लगभग एक सप्ताह में हड्डी जुड़ जायेगी।
  • गूलर के पत्ते भी बहुत ही उपयोगी हैं। मुँह में छाले होने पर गूलर के पत्ते हो पीसकर गोली बना लें और जब भी चले हो तो इस गोली को चूसें।
  • यदि आप को भूख नहीं लग रही है, तो दुलर के पत्तियों को पीसकर गोली बनाकर सुख लें और भोजन के समय इसका सेवन करें आपको भूख लगना शुरू हो जाएगी।
error: Content is protected !!