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बवासीर एक ऐसा रोग है, जिसका दर्द किसी भी उम्र के व्यक्ति के लिए असहनीय होता है। मलाशय के आसपास की नसों की सूजन के कारण बवासीर जैसी गंभीर बीमारी विकसित होती है। बवासीर के दो प्रकार होते हैं अंदरूनी और बाहरी। अंदरूनी बवासीर में नसों की सूजन नहीं दिखाई देती लेकिन यह पीड़ित व्यक्ति को महसूस होती है। बाहरी बवासीर में सूजन गुदा के बिलकुल बाहर दिखाई देती है। पाइल्स यानी की बवासीर. ये काफी तकलीफ देने वाली बीमारी है। पाइल्स में दर्द तो होता है ही लेकिन ये बीमारी असहज भी बना देती है। पाइल्स में स्वेलिंग के साथ ही तेज दर्द भी होता है। एक स्टडी के अनुसार, 50 की उम्र पार करने के बाद 50 फीसदी लोगों को ये शिकायत हो जाती है। पाइल्स होने के कई कारण हो सकते हैं। कई बार कब्ज, पाचन क्रिया के सही नहीं होने पर, बहुत भारी चीजें उठाने पर, गैस की समस्या होने पर, तनाव लेने पर, मोटापा होने पर और एनल सेक्स की वजह से भी ये बीमारी हो जाती है।

खूनी बवासीर में गेंदे के हरे पत्ते नौ ग्राम काली मिर्च के पांच दाने और कूंजा मिश्री दस ग्राम लेकर साठ ग्राम पानी में पीस कर मिला लें। दिन में एक बार चार दिन तक इस पानी को पिएं। गरम चीजों को न खायें, खूनी बवासीर खत्म हो जायेगा।

बवासीर के मस्‍सों को दूर करने के लिए मट्ठा बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए करीब दो लीटर छाछ लेकर उसमे 50 ग्राम पिसा हुआ जीरा और स्‍वादानुसार नमक मिला दें। प्यास लगने पर पानी के स्‍थान पर इसे पीये। चार दिन तक ऐसा करने से मस्‍से ठीक हो जायेगें। इसके अलावा हर रोज दही खाने से बवासीर होने की संभावना कम होती है। और बवासीर में फायदा भी होता है।

बवासीर की बीमारी जब उग्र रूप धारण कर लेती है, तब उस स्थिति में त्रिफला चूर्ण पेट की बीमारी के लिए अमृतस्वरूप है। पेट (शौच) की समस्याएं जब गंभीर रूप धारण करती हैं, तभी बवासीर की बीमारी होती है, ऐसा सभी जानकारों का कहना है।

प्याज के छोटे छोटे टुकडे करने के बाद सुखालें। सूखे टुकडे दस ग्राम घी में तलें। बाद में एक ग्राम तिल और बीस ग्राम मिश्री मिलाकर रोजाना खाने से बवासीर का नाश होता है।

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