रात को सोते समय छोटे बच्चों का बिस्तर में पेशाब करना आम बात है पर 8 साल और 10 साल की उम्र के बच्चे के लिए नींद में बिस्तर गीला करना एक बीमारी भी हो सकती है। वयस्कों के मुकाबले बच्चों का ब्लैडर छोटा होता है जिस कारण वे ज्यादा देर पेशाब रोक नहीं पाते जिससे रात को बिस्तर पर पेशाब हो जाती है। ज्यादातर यह समस्या 4 से 5 वर्ष से काम आयु के बच्चों में देखने को मिलती है। बच्चे जैसे जैसे बड़े होते हैं वे अपने मूत्राशय पर नियंत्रण रखना सिख लेते हैं। बिस्तर गीला करने की समस्या लगभग 5 से 9 वर्ष तक के बच्चों प्रभावित करती है। इसका असर पीड़ित बच्चों के विकास, व्यवहार, के साथ मानसिक समस्याओं के रूप में भी देखा जा सकता है। आइए जानते हैं कि ये इसको कैसे रोका जा सकता है।

आंवले को बहुत अच्छी तरह से बारीक पीसकर कपड़े में छानकर चूर्ण बना लें। यह 3-3 ग्राम चूर्ण रोजाना शहद में मिलाकर बच्चों को सुबह-शाम चटाने से बच्चे बिस्तर में पेशाब करना बंद कर देते हैं।

शांत रहें तथा घृणा या निराशा के भाव का प्रदर्शन न करें। बच्चे को ध्यान दिलाएं कि उसकी इस समस्या से पीछा छुड़ाने के क्रम में आप उसके साथ हैं। मार्गदर्शन के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

तिल और गुड़ को एक साथ मिलाकर बच्चे को खिलाने से बच्चे का बिस्तर पर पेशाब करने का रोग समाप्त हो जाता है। तिल और गुड़ के साथ अजवायन का चूर्ण मिलाकर खिलाने से भी लाभ होता है।

पानी में जायफल घिस कर इसका एक चौथाई चम्मच 1 कप गुनगुने दूध में मिला कर सुबह और शाम बच्चे को पिलाने से बिस्तर गीला करने की समस्या का समाधान करने में मदद मिलती है।

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