चेचक प्राचीन काल का एक रोग है मतलब कि यह रोग कई हजारों साल पुराना है। इसे बड़ी माता और शीतला भी कहा जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि चेचक रोग की चर्चा आयुर्वेद के बहुत ही पुराने ग्रंथों में भी किया गया है। बारह सौ ईसा पूर्व मिस्र की एक ममी की त्वचा पर बहुत ढेर सारे दाने देखे गए थे, जिसे विद्वानों ने चेचक कहा गया। सन सत्तरह सौ छानबे ईस्वी में जेनर में चेचक के टीके का अविष्कार किया था। आपको बता दें कि चेचक दो प्रकार के वायरस के कारण होता है जिसे वायरोला मेजर और वायरोला माइनर कहते हैं। जिसमें में वायरोला मेजर जानलेवा होता है, इसके कारण चेहरे पर दाग, अंधापन जैसी समस्या हो सकती है। मेजर वायरस से 30 से 35 प्रतिशत लोगों की मृत्यु हो जाती है। चेचक होने पर सभी लोग यदि सोचते हैं कि यह जल्दी से कैसे ठीक होगा। वैसे चेचक को पूरी तरह ठीक होने में 8-10 दिन लग जाते हैं लेकिन चेचक को इस वीडियो में बताए गए तरीके से जल्दी से जल्दी ठीक किया जा सकता है।

चेचक होने पर बहुत से लोगों को बुखार हो जाता है इसके लिए आप तुलसी के पत्ते के साथ अजवायन पीस कर मरीज को दें।
भीगे हुए चने पर चेचक के रोगी के हथेलियों को रखना चाहिए। क्योंकि भीगे हुए चने चेचक के विषाणु को खींच लेते है।
चेचक रोगी के बिस्तर पर नीम के छोटी टहनी वाली पत्तिओं को रखना चाहिए और ऐसी ही टहनी से रोगी को हवा देना चाहिए इससे चेचक के विषाणु निकल जाएंगे।
ताजे अंगूर को गरम पानी से धुलकर खाने से चेचक में आराम मिलता है।
छोटे बच्चों को चेचक होने पर फल, हरी सब्जी, दूध, रोटी देना चाहिए।
चेचक के रोगी को मुनक्का या किशमिस खिलाने से आराम मिलता है।

परहेज-
चेचक के रोगी का बिस्तर बिलकुल साफ़ रखना चाहिए।

चेचक हुए परिवार घर में कुछ भी तलना नहीं चाहिए।

रोगी को सदैव नीम उबले पानी से नहलाना चाहिए।

चेचक का वायरस फेस तो फेस आने पर या फिर सीधे मरीज को छूने या फिर मरीज के कपड़ों को भी छूने से भी फैलता है।

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