आयुर्वेद

इन बड़ी बीमारियों से बचाता है सीता जी को बचाने वाला यह वृक्ष अशोक

ashok

औषधि के रूप में अशोक की छाल, फल तथा बीजों आदि का प्रयोग किया जाता है। अशोक का पवित्र वृक्ष जिस स्थान पर होता है, वहाँ किसी भी प्रकार का शोक व अशान्ति नहीं रहती। अशोक की दो किस्में होती हैं. पहले मैं के अशोक की पत्तियां रामफल के वृक्ष जैसी और दूसरे मैं अशोक की पत्तियां आम की पत्तियों जैसी लेकिन किनारों पर लहरदार होती हैं. तो आइये इनके विशेष गुणों को जाने-

 

पान में अशोक के बीज का पाउडर डालकर सेवन करने से सांस लेने में आसानी होती है.

अशोक के फूल का लेप  स्तनों पर लगाने से बच्चे हो उलटी नहीं होती.

अशोक के बीज को पीसकर प्रतिदिन रोज २ चम्मच खाने से मूत्र के रुकने की शिकायत ठीक हो जाती है.

अशोक की छाल का काढ़ा गाढ़ा होने तक बनाए और ठंडा होने पर उसमे उनती ही मात्रा में सरसों का तेल मिलाकर प्रतिदिन मुहांसों पर लगाएं

अशोक के फूलों के रस शहद में मिलाकर पीने से प्रदर में लाभ है.

अशोक की छाल 10 ग्राम को 250ml  दूध में पकाकर सेवन करने से माहवारी सम्बन्धी अनिमियतता और अन्य परेशानियों मे आराम मिलत है.

अशोक की छाल और इसके फूलों को बराबर मात्रा में रात्रि में एक गिलास पानी में भिगोकर रख और सुबह पानी छानकर पी लें. इसी प्रक्रिया को दिन में भी प्रयोग करेंगें सुबह भिगोकर रखी छाल और फूलों का पानी रात्रि में पीने से लाभ मिलता है.

अशोक की छाल और ब्राह्मी का चूर्ण बराबर की मात्रा में मिलाकर रख लें और नियमित 1-1 चम्मच सुबह-शाम एक कप दूध के साथ कुछ महीनों तक सेवन करें. इससे बुद्धि का विकास होगा.

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