आयुर्वेद

गुलाब के फूल के अनोखे औषधीय गुणों को जानें

Rose

गुलाब को फूलों का राजा कहा जाता है यह एक बहुवर्षीय, झाड़ीदार, कंटीला, बेहद सुंदर और खुशबूदार पुष्पीय पौधा है। लेकिन क्या आपको पता है यह खुशबूदार पौधा अपने औषधीय गुणों के लिए भी जाना जाता है। आयुर्वेद की भाषा में गुलाब को महाकुमारी, शतपत्री व तरूणी आदि नामों से जाना जाता है। इसकी सौ से अधिक जातियां हैं जिनमें से अधिकांश एशियाई हैं। जबकि कुछ जातियां यूरोप, उत्तरी अमेरिका तथा उत्तरी पश्चिमी अफ्रीका भी है।गुलाब के पौधे की ऊंचाई 120-180 सेंटीमीटर तक होता है इनके के तनों में 5 पत्तियां मिली हुई लगी होती है। पूरे भारत में गुलाब के पौधे लगाए जाते हैं इसके फूल कई रंगों के लाल, गुलाबी, पीले, सफेद इत्यादि होते हैं। गुलाब के द्वारा गुलकंद और गुलाबजल बनाएं जाने वाले दो पदार्थ अधिक प्रसिद्ध हैं। भारत सरकार ने 12 फरवरी को ‘गुलाब-दिवस’ घोषित किया है। ऋतु के अनुसार गुलाब के दो भेद भारतबर्ष में माने जाने हैं सदागुलाब और चैती। सदागुलाब प्रत्येक ऋतु में फूलता और चैती गुलाब केवल बसंत ऋतु में। चैती गुलाब में विशेष प्रकार की सुगंध होती है और इसे इत्र और दवा बनाने में प्रयोग किया जाता है। गुलाब का फूल कोमलता और सुंदरता के लिये प्रसिद्ध है, इसीलिए लोग छोटे बच्चों की उपमा गुलाब के फूल से देते हैं।

 

जाने गुलाब के इन विशेष गुणों को

 

गुलाब के फूल की पंखुड़ियां चबाने से दांत मजबूत और मसूढ़े स्वस्थ्य होते हैं और पायरिया रोग ठीक हो जाता है।

मुंह की दुर्गन्ध को दूर करने के लिए गुलाब के फूल, गुलाब जल के साथ लौंग और चीनी को पीसकर गोलियां बनाकर चूसने से मुंह की दुर्गन्ध दूर हो जाती है।

कान में दर्द होने पर गुलाब की पत्तियों के रस की थोड़ी बूंदे कान में डालने से कान के दर्द में राहत मिलेगी।

हाजमे के लिए भोजन करने के बाद गुलकंद का सेवन करें।

गुलाब के को सिर के पास रखकर सोने से अनिद्रा की समस्या के साथ-साथ तनाव की समस्या से छुटकारा मिलता है।

गुलाब की पत्तियों को पीसकर ग्लिसरीन डालकर लें। इस मिश्रण को होंठों पर लगाएं। इससे होंठ गुलाबी और चिकने हो जाते हैं।

गुलकंद के सेवन से मुंह के छाले बहुत जल्द ठीक हो जाते हैं।

शरीर के किसी भी हिस्से पर जलन होने पर चन्दन में गुलाबजल मिलाकर लेप करने से आराम मिलता है।

देसी गुलाब और अर्जुन की छाल से बने काढ़े पीने से दिल से जुड़ी बीमारियां समाप्त हो जाती हैं।

लू लगने पर ठंडे पानी में गुलाबजल मिलाकर माथे पर पट्टी रखें।

गुलाब के अर्क में नींबू का रस मिलाकर लगाने से दाद ठीक हो जाता है।

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