आयुर्वेद

विष से बचाता है शिव जी का यह प्रिय पौधा मदार

aak

मदार एक औषधीय पौधा है, इसे आक के भी नाम से भी जाना जाता है । वैसे तो यह एक जहरीला पौधा है, लेकिन इसके अनेक गुण अत्यंत लाभदायक है। इसके पत्ते, फूल, जड़ें और दूध सभी औषधि के रूप में प्रयोग किया जाते हैं। इनकी पत्तिओं और तने में कैलॉट्रोपिन तथा कैलॉट्रोपेगिन रसायन पाया जाता है। मदार का पौधा विषैला होता है, इससे मनुष्य की मृत्यु हो सकती है, इसकी गणना आयुर्वेद संहिताओं में उपविषों में की गई है। यदि इसका सेवन अधिक मात्रा में कर लिया जाये तो, मनुष्य की मौत हो सकती है। इसके विपरीत यदि आक का सेवन उचित मात्रा में, आयुर्वेद वैद्य की निगरानी में किया जाये तो अनेक रोगों जड़ से समाप्त कर सकता है। इनके फूल को भगवान शिव जी को चढ़ाया जाता है। आज हम आपको इनके विशेष गुणों के बारे में बताएंगे जो हमारे लिए उपयोगी है-

  • सर्पदंश में मदार की जड़ को घिसकर पिलाने से जहर का असर कम होता है।
  • यदि शरीर में कही भी कोई नुकीली चीज चुभ गई हो जैसे कांटा तो इसके दूध को लगाने से कांटा निकल जाता है।
  • बिच्छू के डंक मारने पर मदार की जड़ को पीसकर लगाने से पीड़ा कम होती।
  • मदार का फूल अस्थमा, सर्दी, बुखार और ट्यूमर के इलाज के लिए लाभदायक होता है।
  • लम्बे समय से आने वाली खांसी को ठीक करने के लिए मदार के जड़ को पीस लें और
  • काली मिर्च मिलाकर रोजाना सुबह-शाम सेवन करें।
  • मदार का दातून करने से दाँत स्वस्थ्य रहते हैं।
  • मदार के 9-10 फूल पीसकर 1 गिलास दूध में घोलकर प्रतिदिन सुबह 1 महीने पीने से गुर्दे की पथरी पेशाब के रास्ते निकल जाती है।
  • मदार के दूध से हाथ के पंजों में हुए संक्रमण से छुटकारा मिलता है।

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